सदाक़त ही सादगी और इन्सानियत की पहचान है

Hindi Urdu Poetry Stories
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अमीर की महफ़िल से तो अच्छी मुझे ग़रीब को वो महफ़िल पसंद आई,

जहाँ मेज़बानों और मेहमानों में कोई ग़रुरो घमंड के दिखावे नहीं होते.



शादयांने बजतें है जहाँ रस्में महफ़िल निभाएँ जातें हैं अमीरों रईसों के जैसे जहाँ मेहमान बोलाए जातें हैं

दिल तो उनका एक ग्राम का भी ना होगा आरिफ़ अपनों से रिश्तें तोड़कर जो ग़ैरों से निभाएँ जातें है


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