नादांन मोहब्बत

Hindi Urdu Poetry Stories
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सित़म सहकर भी समझ ना सके सित़म गर को अपनों के बीच रह कर आरिफ़,

क्या ख़ूब वफ़ादारी का सिला दिया है अपनों ने अपना कहकर


और ग़ैरों से था मलाल के वो ग़ैर ही रहे फिर अपने जो किया उसे किसी कैसे करें बयां, बेघर ही रहे हम तो भीड़ में भी अपनों के साथ अपने घर में ही तन्हा रहकर


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