श़हीद दिवस

Hindi Urdu Poetry Stories
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दिया है मुल्क़ को जिसने लहु अपनी श़हाद़त से

जहां में आज़ादी सर बुलंदी का हमें एहसास देता है


वत़न के वास्ते सर कट गया लेकिन झुक नही दिया यही तो अस्ल में मर्दे मुजाहिद का वो जज़्बात होता


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