मै अपने हिस्से का सारा
सामान छोड़ आया हूँ
सिर्फ़ यादें साथ रख
पूरा मकान छोड़ आया हूँ
सफ़र मुश़किल भरा मेरा
और है ये रास्ता लंबा
मै अपनी ख़ुश़ियों को घर
की गली में छोड़ आया हूँ
हुआ मैं आब दीदा जब भी
याद आता है अपना घर
बड़ी मुश्किल से मै अपने
चमन को छोड़ आया हूँ
ना मुझको शौक़ है ना मर्ज़ी
मेरी प्रदेश यूँ दिन बिताने का
हाय ग़ुर्बत मेरी आरिफ़ वत़न से दूर
और अपनो से भी यहाँ क़िस्मत से आया हूँ
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