(वक़्त और चीजों की 25 मे अहमियत़ समझो तभी ये तुम्हारी 60 मे क़दर करेंगी )

Hindi Urdu Poetry Stories
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ग़ुज़ार दी ज़िन्दगी हमने अपनी ग़फ़लतो ग़लत फ़हमी और फुज़ूल ख़र्ची मे आरिफ़

हुई जो उम्र साठ बर्स की तो ये एहसास हुआ सभंल जाते पच्ची़स मे ही तो अच्छा था


✒मोहम्मद आरिफ़ इलाहाबादी

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