अप्रैल फ़ूल ऐक जाहिलाना परंपरा है

Hindi Urdu Poetry Stories
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ये अप्रैल फ़ूल क्या है सारा जहां ये क्यों मनाता है जो ख़ुश़ियां दे नहीं सकता उसे कोई क्यों सजाता है


जो देता है दिलों में शक़ की गुंजाइश़ बिना मतलब ज़माना फ़िर भला कैसे इसमें सुकून पाता है


मुझे तो कोई रग़बत ही नहीं एैसी फ़हश़ी सक़ाफ़त से भला जो कर नहीं सकती किसी का तो ये कोई क्यों निभाता है


ये बिन मतलब की झूठी शान ये अफवाहें कला बाज़ी

ये तो है एक मग़्रिबी कल्चर भारत इसे फिर क्यों मनाता है

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