मुख्यपृष्ठ Hindi Urdu Poetry Stories ज़ालिम हुक्मरान, ग़ाफ़िल अवाम ज़ालिम हुक्मरान, ग़ाफ़िल अवाम By -Hindi Urdu Poetry Stories अप्रैल 20, 2019 0 Hindi Urdu Poetry Stories एहसासे ज़माना क्या कहिये अंजाम की कोई परवाह़ ही नहीं मसनद़ पे है क़ब्ज़ा ज़ालिम का मज़लूम का कोई रह़बर ही नहींहक़ बात यहाँ कहना मुश्किल है बचके यहाँ रहना मुश्किलइल्ज़ाम लगाकर चोरी का और कहतें है गऊ तस्कर है यहीबदमाश़ है इनमें ये सारे ग़ुडें है ये इनसांन नहीं ये दरिंदें हैक़ानून को अपने हाथों में लेकर कहतें है बस गऊ रक्षा है यहीसरकार खड़ी ख़ामोंश रही वो काम अपना यूँ करतें रहेंहर बार झूठे इल्ज़ामों में मुस्लिम इनके हाँथों मरते ही रहेऔर मुस्लिम मरे तो पुनः मिलें आरिफ़ और ब्राह्मण मरे तो श्रापहर रोज़ ग़ुडें अधर्मि लोगों से इनसांनियत यूँ ही मरती ही रही Tags: #indianpoetry #poetryHindi Urdu Poetry Stories Facebook Twitter Whatsapp और नया पुराने
एक टिप्पणी भेजें
0टिप्पणियाँ