रब पर भरोसा और ख़ुद पर ऐतेमाद़ी दौरे ज़ुल्मत में

Hindi Urdu Poetry Stories
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मुझे टूट कर यूंही

बिखर जाने दो  


ज़िंदगी को मेरी

त़ार-त़ार बन जाने दो


मै ख़ुद ही निपट लूंगा

अपने हालात से आरिफ़


बस गर्दिश़े तूफ़ां को

 ज़रा संभल जाने दो


और मेरा रब देख रहा है

मदद तो आएगी उसकी


ये आज़माईश है बस

इसे भी यूँही गुज़र जानें दो



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