मिट्टी के जिस्म में आग के श़ोले

Hindi Urdu Poetry Stories
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श़बनंम के हर एक क़तरे पर फ़ूलों को मचलते देखा है

आग़ोशे समंदर में हमनें दरिया को सिमटते देखा है


हैरत है यहां इनसांन बना है मिट्टी का फ़िर भी आरिफ़

इनसानों के हाथों इसांनियत कई बार ही मरते देखा है


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