पहचान मेरी मोहताज नहीं बस नाम ही काफ़ी है अपना'
भारत का रहने वाला हूँ पहचान ये काफ़ी है अपना
हर मुल्क में अपनी शोहरत है हर शहर में सिक्के चलते हैं,
ये सब मेरे रब की इनायत है हर जगह में डंका है अपना
दुश्मनों ने हमको है तोड़ा हमदर्दों ने हमको जोड़ रखा, इस मिट्टी की मोहब्बत मेंआरिफ़ ग़ैरों संग नाता है अपना
है धर्म यहाँ तो बहोत सारे और त्योहार भी यहाँ निराले हैं, इस देश की इस्मत की ख़ातिर हम सर भी कटातें है अपना
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