[ग़ुरुर अना ऐक काग़ज़ की नाव की तरह है]

Hindi Urdu Poetry Stories
By -
0
जो दरिया चलती है अपने ग़ुरुरो अना के जोश़े जवानी में वो खो देती है अपना नामों निश़ा मिलकर समंदर के पानी में आरिफ़ मोहम्मद इब्राहिम,इलाहाबादी

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*