(हमारी पहचान हमारा अख़लाक़ है) (हमारी पहचान हमारा व्यवहार है)

Hindi Urdu Poetry Stories
By -
0
क़राबत का तरीक़ा दुश़्मनों ने हमसे सीखा है जहां भर में,
हम अपनी सूरत से नहीं सीरत से पहचाने जाते हैं


            🇮🇳✍️ मोहम्मद आरिफ़ इलाहाबादी

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*