बचपन की यादें

Hindi Urdu Poetry Stories
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मुझे बचपन के वो गुज़रे ज़माने याद आतें है,वो नन्हें हाथों के ऐक आशियाने याद आतें है


पुराने दिन की बातें थी साथी दुलारे यार रहते थे,कहां वो खो गया बचपन जहां हम साथ रहतें थे


वो प्यारा बचपना सबका वो भोली भाली सी सूरत,वो भोली सूरतों में भी हम बहोत शैंतान होतें थे


नदी तालाबों में भी हम खेलते थे साथ में मिलकर,वो प्यारा बचपना खेलें लड़े भी साथ में होकर


ना हम्मे धर्म की बातें ना हम्मे ज़ात का मसला,फ़क़त ऐक बात होती थी जो हम्मे खेल का मसला


ना उनमें हिंदू होता था उनमें ना कोई भी मुस्लिम,मगर हर खेल बचपन का मज़ा बारिश की हो रिमझिम


जवां मै हो गया आरिफ़ अभी कुछ यादें हैं बाक़ी,जो आंसू आंखों में लाकर मुझे हर दम रुलांते है

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मुझे बचपन का वो गुज़रा ज़माना याद आता है,वो नन्हे हाथों का एक आशियाना याद आता है


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