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बेज़ुबान दिलों के ज़ख़्म

दिलों के घावों को कोई भी नहीं देखता आरिफ़ चेहरे से तो सभी ख़ुशहाल दिखतें है, समंदर की ख़ामोश़ी भी ऊपर से सबको पता है मग…

हमारे दीन मज़हब की पहचान इन्सानियत मोहब्बत

मत पूछिए हमसे के मेरा दीन कैसा है मेरा ये धर्म मज़हब भी मेरे ईमान जैसा है सदाक़त का सलीक़ा हमसे है सीखा ज़माने ने …

इनसांन और उसकी तकलीफ़ के अस्बाब समझों

किस्से अपना दर्द कहूँ सब चेहरे अनजाने है कौन सुनेगा अपना दुख सबके यही फ़साने है, सोने-चांदी की क़ीमत तो इनसांनों से …

मज़लूम की दर्द भरी आंह

आंह जो मज़लूम की निकलेगी आंखों में पानी लेकर तो ज़ालिम पे बर्बादी का मंज़र सरेआम नज़र आएगा Hindi Urdu Poetry Stories��…