(मासूम़ दिल अंजान था)

Hindi Urdu Poetry Stories
By -
0
जिस पर फख़्र और ऐते़माद़ था मुझे हमेश़ा से हर तरह के राह़े सफ़र मे आरिफ़

मगर अफ़सोस है के वही सरे राह मुझे तड़पता हुआ अकेला छोड़ गया
   


        ✒ मोहम्मद आरिफ़ इलाहाबादी



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*