मुख्यपृष्ठ Hindi Urdu Poetry Stories (वत़न हमसब का हमसब वत़न के है) (वत़न हमसब का हमसब वत़न के है) By -Hindi Urdu Poetry Stories नवंबर 25, 2018 0 ना ख़ौफ़े हुक़ूमत है मुझको और ना अंजाम की कोई परवाह़ जीने की आज़ादी है सबको यहां कहता है मेरा आईने हिंदोस्तां ✒मोहम्मद आरिफ़ इलाहाबादी Tags: #indianpoetry#poetryHindi Urdu Poetry Stories Facebook Twitter Whatsapp और नया पुराने
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