बचपन की यादें
मुझे बचपन के वो गुज़रे ज़माने याद आतें है,वो नन्हें हाथों के ऐक आशियाने याद आतें है पुराने दिन की बातें थी साथी दुलारे …
मुझे बचपन के वो गुज़रे ज़माने याद आतें है,वो नन्हें हाथों के ऐक आशियाने याद आतें है पुराने दिन की बातें थी साथी दुलारे …
पुरनूरे असरार हूँ मै जलता रहूंगा अपनो की रगों में आरिफ़ यूंही चलता रहूंगा, हमें ना मिटाने की कोशिश़ करो तुम मैं हीरा…
श़बनंम के हर एक क़तरे पर फ़ूलों को मचलते देखा है आग़ोशे समंदर में हमनें दरिया को सिमटते देखा है हैरत है यहां इनसांन ब…
माँ की हिम्मत में क़यामत की अदा देखी है हर एक मुश़्किल से टकराने की अदा देखी है गर सामने मौत़ भी तो परवाह नहीं उसको …
मुझे टूट कर यूंही बिखर जाने दो ज़िंदगी को मेरी त़ार-त़ार बन जाने दो मै ख़ुद ही निपट लूंगा अपने हालात स…
मै अपने हिस्से का सारा सामान छोड़ आया हूँ सिर्फ़ यादें साथ रख पूरा मकान छोड़ आय…
Remembering #AllamaMohammadIqbal On His Death anniversary. On 21 April 1938 he Died. Iqbal widely known as ﻋﻼﻣﮧ محمد …
Hindi Urdu Poetry Stories एहसासे ज़माना क्या कहिये अंजाम की कोई परवाह़ ही नहीं मसनद़ पे है क़ब्ज़ा ज़ालिम का मज़लूम …
Hindi Urdu Poetry Stories बदस्त़ूर निज़ामे मोहब्बत़ को निभाते चले गये ख़ुद रोए दिल मे अपने उनको हसांते चले गये म…
दिल जला कर जागा रातों को मैं चराग़ो की जगह ज़िन्दगी की श़मां ही ख़ामोंश़ हो गई सुबह होते होते Hindi Urdu Poetry Stori…
पार्टी कोई भी हो ग़ुलामी बेजान मत करना चंद रुपयों के लालच में अपनी ताक़त नीलाम मत करना आंखें खोलकर और दिमाग़ की बत्ती ज…
Hindi Urdu Poetry Stories ये अप्रैल फ़ूल क्या है सारा जहां ये क्यों मनाता है जो ख़ुश़ियां दे नहीं सकता उसे कोई क्यो…
दिया है मुल्क़ को जिसने लहु अपनी श़हाद़त से जहां में आज़ादी सर बुलंदी का हमें एहसास देता है वत़न के वास्ते सर कट गया ले…
सित़म सहकर भी समझ ना सके सित़म गर को अपनों के बीच रह कर आरिफ़, क्या ख़ूब वफ़ादारी का सिला दिया है अपनों ने अपना कहकर और…
अमीर की महफ़िल से तो अच्छी मुझे ग़रीब को वो महफ़िल पसंद आई, जहाँ मेज़बानों और मेहमानों में कोई ग़रुरो घमंड के दिखावे नह…
मोहब्बत की मिसालें आज भी देतीं हैं ज़माने को वो एक ख़ातून है हमको जो कभी गिरने नहीं देती कभी वो मां की सूरत में कभी बहन…
उधर पुलवामा में सीआरपीएफ के कई जवानों ने जब श़हाद़त पाई थी, तो इधर ऐकंर चैनलों के गोदी मीडिया में न्यूज़ से ख़ूब ट…
हिम्मत़े मर्दी का हम अपने दिल में एहसास रखते हैं, क़ब्ज़े में भी दुश्मनों से आंख मिला कर बात करते हैं मौंत़ो हय़ात…
जो दरिया चलती है अपने ग़ुरुरो अना के जोश़े जवानी में वो खो देती है अपना नामों निश़ा मिलकर समंदर के पानी में आरिफ़ मोहम…
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद या अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन ( 11 नवंबर , 1888 को सऊदी अरब के शहेर मक्का शरीफ़ में पैदा ह…
ज़ालिमों श़र पसंदों की सेयासत में क़द्रो ऐह़तेराम है जितना मज़लूमों बेबसों पर बाक़ी अभी ज़ुल्म का अंजाम है उतना, ओह़दे …
कश्मीर में मासूम ज़िन्दगी के ठेकेदार बैठे हैं कुछ इस तरह से तांक़ में भारत के बहादुर जवानों के क़त्ल के ज़िम्मेदार ब…
ये कैसा कोह़राम मचा है ज़लालत का ज़माने में हर कोई लगा है हर किसी को आज़माने में आरिफ़ हमसब अपना गिरेबांन देखले पहले ज…
अजीब है बात है आरिफ़ के रात दिन जो मुझ पर ऐतराज़ करतें हैं, औक़ात नहीं जिनकी सर उठाने की वो हर जगह मेरी बात करतें हैं औ…
क़राबत का तरीक़ा दुश़्मनों ने हमसे सीखा है जहां भर में, हम अपनी सूरत से नहीं सीरत से पहचाने जाते हैं 🇮…
मां की ममता का हक़ अद़ा बेश़क़ इस जहांन में किसी औलाद़ से क्या होगा जन्नत है जिसके क़दमों तले दुनिया में मह़श़र में उ…
मै अपना ग़ुज़रा हुआ वो बचपना कभी जब याद करता हूँ, नमीं आँखों मे होती है तो चेहरे पे मुस्कान लाता हूँ कभी ज़िद मे माँ…
मोहब्बत़ है गर वत़न से हमको भी समझो वत़ने अज़ीज़ अपना औरो तरह हमने भी अपने वत़न के ख़ातिर है अपना ख़ूँ बहाया …
हमे ये फख़्र है हमारी ज़ुबान उर्द़ू है मोहब्बत़ के इस प्यारे वत़न मे मोख़्तलिफ़ ज़ुबानों के जैसी प्यारी ज़ुबान उर्द़ू ह…
ये मेरा मुल्क़़ है ऐक बांग़बाँ है के जिसमे हर क़िस्म के फ़ूल और कली है वत़न की मुख़्तलिफ़ प्यारी ज़ुबाँ इसी से दिल ज…
हमारी श़ान है भारत हमारी जान है भारत हम है भारत से हमारी पहचान है भारत मुस्लिम है हम हमे ये फख़्र है अजल से, दुनिया…
दिल टूटा ज़ुंबा ज़ख़्मी नज़र कमज़ोर मुझको उनपर तर्स आती है के फिक़्र मे कोई माँ अपने किसी बच्चे की जब आंसू बहाती है …
दिल जो टूटा मोहब्बत़ इश्क़ मे तो समझो वफ़ा का माद्द़ा टूटा दग़ा बाज़ो की फ़ितरत को समझने का ये अच्छा सलीक़ा है …