(आखेँ खोलो और सच्चाई से सामना करो हक़ हमेशा़ ग़ालिब रहेगा)
गांव नगर बस्ती श़हेरो की मस्जिदें ख़ाली रहती है हमेंश़ा नमांज़ियो से तो श़ायद रह जायेंगे ज़रा सोचों नमाज़ी हो ना हो न…
गांव नगर बस्ती श़हेरो की मस्जिदें ख़ाली रहती है हमेंश़ा नमांज़ियो से तो श़ायद रह जायेंगे ज़रा सोचों नमाज़ी हो ना हो न…
ये कैसा सित़म है के ख़फा भी हमी से वफ़ा भी हमी से मेरा प्यार तुमसे तुम्हारा हमी से ये सांसे सलामत है जब तक जहां मे चल…
तलवे चाटने की आदत नही अपनी किसी साहूकार की जनाब़ नही तो कब के संवर जाता सच बोलता हूँ मै साहब कोई झूट नही ज़मीर अपना ब…
ग़रूर और अना के समंदर मे ग़र्क़ो बर्बाद़ हो गये हजारों बादश़ाह यूहीं ऐक मोहब्बत़ के समंदर ने ही सारी इनसांनियत को ज़ि…
श़ख़्सियत अपनी अलग दिखाईऐ अख़लाक़ मे अपने नर्मी लाईऐ मजबूरो मोहताजो के हर पल काम आईऐ लोगों के दिलों मे मोहब्बत़ ख़ुद …
बात मेरी मोक़म्मल कहां हुई है आरिफ़ ज़माने को मोक़म्मल ज़रा पूरी बात होने दो ये महफ़िल है श़ोअराओ की अपने कलाम पेश़ क…
रात की तनहांईयो मे मै अक़्सर सोचा करता हूँ यही के ये रात भी कितनी बेवफ़ा है सुबह तक साथ और फ़िर छोड़ देती है दिन की बेब…
होंटो पे मुस्कुराहट है चाल मे अंदाऐ हर काम है फ़रेबी और अंदाज़े क़ातिलाना मख़्सूस कर के हमको चाहों वफ़ा मे अपनी अल्फ़…
ज़िन्दगी जी एैसे रहे है हम जैसे कभी मरना ही नही और मर एैसे जाते है हम जैसे कभी जिया ही नही ख़्वाबों ख़्यालो मे कट…
दूर है तो क्या हुआ हर चीज़ का ऐहसास रखते है छुपी हो या ज़ाहिर हर बात की मालूमात रखते है 🖋मोहम्मद आरिफ़ इलाहाबादी
तय्यार तो हूँ बाख़ूबी ख़ुश़ी से ऐ दोस्त आपकी ज़िन्दगी को हर ऐक लम्ह़ा देने लिए मगर क्या पता श़ायद मौत़ को गवारा…
हर रोज़ इराद़ा करता हूँ मै माज़ी के लम्ह़े भूल जाने की तुम्हारी याद आती मै मजबूर होता हूँ और इराद़ा टूट जाता है …
बहोत तक़्लीफ़ होती है और दिल भी टूट जाता है जब कोई अपना होकर भी ग़ैरो जैसा पेश़ आता है ****************…
मुझे अफ़सोस है के जो ख़ुद को मुल्क़ का रहबऱो हमदर्द़ कहते है वो ख़ुद देखे वो कैसे है जो उर्द़ू बोलने वालो को दहश़त ग…
जिस पर फख़्र और ऐते़माद़ था मुझे हमेश़ा से हर तरह के राह़े सफ़र मे आरिफ़ मगर अफ़सोस है के वही सरे राह मुझे तड़पता हुआ …
तुम्हें पाने की है चाहत़ तुम्हें खोने का लगता डर तुम्हारा इश़्क ही है ये फ़िक्र जो हमारे साथ रहती है ✒मोहम्मद आरिफ…
हम अपनी मोहब्बत़़ की मुल्क़ मे अनूठी पहचा़न रखते है मुस्लिम है इसीलिए हांथो मे तिरंगा और दिल मे हिंदोस्तांन रखते है …
ना ख़ौफ़े हुक़ूमत है मुझको और ना अंजाम की कोई परवाह़ जीने की आज़ादी है सबको यहां कहता है मेरा आईने हिंदोस्तां …
ऐ वत़न ऐ वत़न मेरे प्यारे वत़न मेरी आखोँ के तारे दुलारे वत़न ऐ वत़न ऐ वत़न मै जियूंगा यही मै मरूंगा यही तेरे क़दमों म…
अभी ज़ालिमों की पहचान बाक़ी है अभी इल्ज़ाम बाक़ी है अभी मज़लूमों पर किया हुआ हर ऐक इंतेक़ाम बाक़ी है मेरे मौला कर दे…
हम मोहिब्ब़े वत़न है हमे गद्द़ार ना समझो हम जंगे आज़ादी के वो फ़ूल है हमे तुम ख़ार ना समझो छोड़ा दी है पसीने हमने जिन…
ख़ुद की तारीफ़े जो बंद अल्फ़ाज़ो मे किया करते है आरिफ़ अक्स़र वही लोग द़निश़मदों को अपनी गुमराही का सबूत़ देते ह…
मेरी पर्ख़ी हुई नज़रो को जाने क्यों एैसा लगता है आरिफ़ हमारे बीच ही कोई प्यारा बनकर के धोख़ा दे रहा हमको ✒मोहम्मद …
ज़िन्दगी मे किसी की जो लोग अहमियत़ नही समझते थे आरिफ़ बादे विसाल अक्स़र वही लोग कहते है के बहोत अच्छा इनसांन था ✍मो…
ग़ुज़ार दी ज़िन्दगी हमने अपनी ग़फ़लतो ग़लत फ़हमी और फुज़ूल ख़र्ची मे आरिफ़ हुई जो उम्र साठ बर्स की तो ये एहसास हुआ सभ…
तेरे सारे ग़ुमान टूट कर मिट्टी के ज़र्रो मे बदल जाऐगें आरिफ़ बस ज़िन्दगी को मौत़ का तु ज़रा आईना दिखा कर देख ✒मोहम्…
ख़ुशी हो या ग़म आरिफ़ दोनों ही मे हमारी नाज़ उठायी जाती है कभी दूल्हा बनाया जाता है तो कभी मय्य़त सजाई जाती है ✒मो…
ये कैसा क़यामत़ ख़ेज़ मज़र है के छ़ाया है बद़ अम़नी का नज़ारा वत़न मे चारों सूं ना इनसांनियत़ है किसी मे अब और नाही क…
क़यामत़ टूट पड़ती है उस रोज़ जिगर छलनी हो जाता है कोई बाप जब जवान बेटे का जनाज़ा अपने काधें पर उठाता है ✒मोहम्मद आरि…
ये कैसी हुक़ूमत है के छाया है हर तरफ़ ज़ुल्मतो़ का बादल वत़न मे चारों सूं कोई मंदिर बनाता है तोड़कर मसजिद तो कोई करता …
नफ़रतों को मोहब्बत़ से बदला जा सकता है हर दिलों मे रहती दुनिया तक ना,तू ,तू ,ना ,मै ,मै , बश़र्ते ये है के पहले शुरू…
अपनी बात को कहो किसे से भी मगर इज़हारे अद़ब से आरिफ़ अच्छे लोग अल्फा़ज़ नही इज़हारे जज़्बात को समझते है ✍मोहम्मद आ…
तन्हाई मे मेरे अपने दिल की धड़कन ही क़रीब दिखती हैे आरिफ़ एैसा इत्त़ेफाक़ ज़िन्दगी मे मैने बहोत दफ़ा आज़माया है ✍मो…
कुछ फैसले लोग जज़्बात मे कर लेते है तक़्दीर को छोड़ वक़्त की अहमियत़ को जान कर मगर तक़्दीर का लिखा किसने देखा है वो तो…
लगा दो धर्म और ज़ाती की मोहऱ लह़ू की हर ऐक बोतल पर वत़न पे मिटने वालों का अभी पहेचांन बाक़ी है ✍मोहम्मद आरिफ़ इलाह…
क़ानून को ताक़ पर रख किये थे क़त्लो ग़ारद जो वही अब कह रहे हैं हम नया भारत बनाएंगे हुक़ूमत देख कर अपनी समझ बैठे है…
हुक़ूमत हो किसी की भी कैसी परवाह ना करे चाहे हो गर्दिशे़ ज़ुल्मत वही जांबाज़े सिपाह़ी असल मे कौ़मो मिल्लत़ के सरताजो …
मज़लूमों बेकसों को ज़ालिमों के चंगुल से आज़ादी दिलाना दोस्तों किसी जेहाद़ से कम नही एैसे ही मर्दे़ मुजाहिद़ को हक़ीक़…
तक़दीर से पहले उम्मीद़ से ज़्यादा किसी को कुछ नही मिलता आरिफ़ जहांन मे बस माँ की दोआऐं ही है जो आसमान से चांद त़ारे भ…
बेवाफ़ाई जो तूने की किसी से तो तनक़ीदे वफ़ा होगी तुझ पर भी आरिफ़ इल्ज़ाम एैसा मोहब्बत़ मे बेवाफ़ाओं के सिवा किसी पर न…
नसीबों का मालिक ये क़ाएनाते दुनिया का ख़ालिक़, के हर शै उसी की तरफ़दार है, ओ अल्लाह राज़िक , ओ अल्लाह राज़िक, दि…
हम ये सोच कर रहे गये वत़न की मोहब्बतों चाहत़ मे के बच जाऐ सक़ाफ़ते हिन्दोस्तां मोहब्बत़ भाई चारे का इसीलिए मुझे अपना…
भटक रहा था तन्हा मुझे ऐक कारवां की तलाश़ थी मिला जो कारवां तो सबके सब भटके मोसाफ़िर निकले बहोत सोच कर इराद़ा किया ज…
मोहब्बत़ हो तो एक तरफ़ा ये कैसी इश्क़ शाज़ी है मेरे हमदम मेरे हमराह कोई दिल नया रख ले ✍मोहम्मद आरिफ़ इलाहाबाद…
बुराईयां तलाश़ना किसी की बहोत आसान है दुनिया में आरिफ़ मगर ख़ुद के एैब लोगों पर जो शाया हो तो लोग पसंद नही करते तारी…
ज़ाहिरी मुत़्तहिद होने से भी कोई फायदा नही किसी का आरिफ़ इस जहांन मे जब तक दिल मे मोहब्बत़ इनसांनियत और जोशे़ ईमानी नह…